किलिमंजारो के प्रशिक्षण के बारे में सबसे उपयोगी वाक्य यह है: अगर आप पूरे दिन पहाड़ियों में चल सकते हैं, और अगली सुबह उठकर फिर वही कर सकते हैं, तो आप पर्याप्त फ़िट हैं. नीचे सब कुछ इसी के बारे में है कि वहाँ तक कैसे पहुँचें.
पैरों पर बिताए समय से शुरू कीजिए
गति नहीं, दूरी नहीं, समय. डेपैक लेकर असमान ज़मीन पर छह घंटे की पैदल यात्रा की ओर बढ़िए. ऐसा कुछ बार कीजिए और पर्वत डरावना लगने के बजाय जाना-पहचाना लगेगा.
फिर इसे लगातार कीजिए
एक लंबा दिन अच्छा संकेत है. लगातार दो लंबे दिन उससे बेहतर संकेत हैं, क्योंकि पर्वत पर एक हफ़्ता असल में यही है. शनिवार और रविवार की पैदल यात्रा आपको हफ़्ते के पाँच जिम सत्रों से ज़्यादा सिखाती है.
जानबूझकर ढलान पर उतरिए
लोग ऊपर चढ़ने का प्रशिक्षण करते हैं और फिर उतराई से टूट जाते हैं. किलिमंजारो पर उतराई तेज़ी से होती है, और आख़िरी दिन लंबा होता है. एक पहाड़ी ढूँढ़िए और उस पर बार-बार तब तक उतरिए जब तक आपके घुटने शिकायत करना बंद न कर दें.
बूट पहनिए
हर जोड़ी बूट को पहन-पहनकर पैरों के मुताबिक़ ढालना पड़ता है और आपके बूट कोई अपवाद नहीं हैं. 4,000 मीटर पर छाले सचमुच यात्रा को बदल देने वाली समस्या हैं. जिन बूटों में आप शिखर पर पहुँचें, उनमें पहले से सौ किलोमीटर चले हुए होने चाहिए.
वही बैग उठाइए जो आप उठाएँगे
पोर्टर आपका डफ़ल बैग उठाते हैं. आप पानी, परतों, स्नैक्स और कैमरे वाला डेपैक उठाते हैं, जो तीन लीटर पानी भर जाने पर लोगों की उम्मीद से भारी होता है. उसी वज़न के साथ प्रशिक्षण कीजिए.
क्या कम मायने रखता है
तेज़ दौड़ना. भारी वज़न उठाना. ऊँचाई वाले टेंट. पच्चीस साल का होना. इनमें से कोई भी आपको उस पर्वत पर ज़्यादा फ़ायदा नहीं देता जहाँ सीमित करने वाला कारक ऑक्सीजन और धैर्य है.
बारह हफ़्तों की एक सरल योजना
- हफ़्ता 1 से 4: हफ़्ते में तीन पैदल यात्राएँ, उनमें से एक कम से कम दो घंटे की.
- हफ़्ता 5 से 8: पहाड़ियाँ जोड़िए. हफ़्ते में एक चार घंटे की पैदल यात्रा, भरे हुए बैग के साथ.
- हफ़्ता 9 से 11: हर दो हफ़्ते में एक ऐसा सप्ताहांत जिसमें लगातार दोनों दिन चलें. हर दिन पाँच या छह घंटे.
- हफ़्ता 12: ढील दीजिए. थके हुए पहुँचना थोड़े कम प्रशिक्षित पहुँचने से बदतर है.